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मचान पद्धति से साकार हुआ सगरी बाई का सपना

मैं सगरी बाई भोयना, ग्राम खामडोधगी की निवासी हूं। दो साल पहले तक हमारा परिवार खेती से बहुत कम आय अर्जित कर पाता था, जिससे घर चलाना मुश्किल हो रहा था। परंतु, आज मेरी जिंदगी बदल चुकी है,

इस कार्यक्रम के तहत मुझे मचान पद्धति से सब्जी उत्पादन करने की ट्रेनिंग मिली। इस तकनीक से कम जगह में अधिक फसल उगाई जा सकती है, जिससे उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि होती है। मैंने इस पद्धति को अपनाया और विभिन्न प्रकार की सब्जियां उगाने लगी।

पिछले दो मानसून सीज़न में ही मैंने ₹23,500 की आय सब्जी बेचकर अर्जित की। यह अतिरिक्त आमदनी मेरे परिवार के लिए वरदान साबित हुई और हमें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया। अब मैं आत्मनिर्भर हूं और अपने बच्चों की शिक्षा तथा घर की जरूरतों को आसानी से पूरा कर पा रही हूं।

महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी सगरी बाई

सगरी बाई की यह सफलता सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि कई अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा है। एसबीआई फाउंडेशन और समर्थन – सेंटर फॉर डेवलपमेंट सपोर्ट के सहयोग से अब तक 795 महिला किसानों को खेती की उन्नत तकनीकों, फसल विविधीकरण और कम जल खपत वाली कृषि पद्धतियों से जोड़ा गया है।

यह पहल न केवल महिलाओं की आजीविका को सशक्त बना रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रही है। सगरी बाई जैसे किसान हमारे समाज में बदलाव की नई कहानी लिख रहे हैं।

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